दुर्गा माँ अमृतवर्षा
इस जग में सब से बड़ा माँ दुर्गा का नाम
जय माता दी जपने से बनते बिगड़े काम
दुर्गा मंदिर जाइये करके माँ का ध्यान
ज्यों ज्यों पग आगे बढे कोटिन यज्ञ समान
दुर्गा मन्त्र के जाप से भस्म हो जाये पाप
रोग शोक पल में मिटे कटे कोटि संताप
दुर्गा चालीसा जो पढ़े नित करके असनान
सकल मनोरथ पूर्ण हो कहते वेद पुराण
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
भक्तो पे सुख बरसाती माँ की महिमा अनंत
दुर्गे दुर्गति नाशिनी करते दुखों का अंत
काम क्रोध मद लोभ का पल में करे संघार
बल बुद्धि विद्या देकर करती है उपकार
माँ का सुमिरन जो करे माँ देती वरदान
सुख संपत्ति वैभव मिले जग में होई महान
शक्ति स्वरुपणी माँ दुर्गा भय का करती नाश
भाव भक्ति से खुश होकर घर में करती वास
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
माँ दुर्गा का नाम ही बनता है पतवार
अंत समय में भक्तो को भव से करता पार
जपो रे मन जगदीश्वरी जपो रे मन जगदम्ब
काम सभी पूरण करती करती नहीं विलम्ब
दुर्गा सप्तसती का जो पाठ करे मन लाय
यश कीर्ति आयु बढे मन वांछित फल पाय
सरस्वती के रूप में विद्या का दे दान
माँ की कृपा से मुरख भी बन जाते विद्वान
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
महालक्ष्मी के रूप का जो भी करे गुणगान
सुख शांति समृद्धि का माँ देती वरदान
जब जब पाप बढे धरती पे माँ लेती अवतार
महाकाली बन दुष्टों का करती है संघार
सत्य सनातन धर्म का लेके ध्वजा हनुमान
माता के आगे चलते महावीर बलवान
अम्बे माँ है जगजननी हम सब हैं संतान
श्रृष्टि का हर जीव है माँ के पुत्र समान
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
वीर सपूतों के सदा सिर पर रखते हाथ
रणभूमि में देती है माँ बेटे का साथ
माँ की छवि मन मंदिर में जिसने ली बसाय
रोग मुक्त हो तन उसका काया कल्प हो जाय
श्रृंगारी जो भी करे छप्पन भोग लगाय
रंक भी राजा बन जाए माँ की कृपा जो पाय
नवरात्री में नव कन्या को भोजन जो करवाय
ग्रह दोष से मुक्त हो नवदुर्गा हो सहाय
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
जब कोई तकलीफ हो माँ को करना याद
माँ दौड़ी आ जाएगी सुनते ही फरियाद
माँ की आरती जो करे घी का दीप जलाय
बिगड़े भाग्य संवारती किस्मत को चमकाय
माँ की ममता का नही जग में कोई मोल
भक्तों की झोली भरती देती खजाने खोल
करता जो मैया जी के चरणामृत का पान
ब्याधि बाधा सब दूर हो जग में मिले सम्मान
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
SONG LINK:
https://www.youtube.com/watch?v=vY5uX4sVz-k
KARAOKE LINK:
https://youtu.be/mUf2aW7hvlY
जय माता दी जपने से बनते बिगड़े काम
दुर्गा मंदिर जाइये करके माँ का ध्यान
ज्यों ज्यों पग आगे बढे कोटिन यज्ञ समान
दुर्गा मन्त्र के जाप से भस्म हो जाये पाप
रोग शोक पल में मिटे कटे कोटि संताप
दुर्गा चालीसा जो पढ़े नित करके असनान
सकल मनोरथ पूर्ण हो कहते वेद पुराण
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
दुर्गे दुर्गति नाशिनी करते दुखों का अंत
काम क्रोध मद लोभ का पल में करे संघार
बल बुद्धि विद्या देकर करती है उपकार
माँ का सुमिरन जो करे माँ देती वरदान
सुख संपत्ति वैभव मिले जग में होई महान
शक्ति स्वरुपणी माँ दुर्गा भय का करती नाश
भाव भक्ति से खुश होकर घर में करती वास
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
अंत समय में भक्तो को भव से करता पार
जपो रे मन जगदीश्वरी जपो रे मन जगदम्ब
काम सभी पूरण करती करती नहीं विलम्ब
दुर्गा सप्तसती का जो पाठ करे मन लाय
यश कीर्ति आयु बढे मन वांछित फल पाय
सरस्वती के रूप में विद्या का दे दान
माँ की कृपा से मुरख भी बन जाते विद्वान
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
सुख शांति समृद्धि का माँ देती वरदान
जब जब पाप बढे धरती पे माँ लेती अवतार
महाकाली बन दुष्टों का करती है संघार
सत्य सनातन धर्म का लेके ध्वजा हनुमान
माता के आगे चलते महावीर बलवान
अम्बे माँ है जगजननी हम सब हैं संतान
श्रृष्टि का हर जीव है माँ के पुत्र समान
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
रणभूमि में देती है माँ बेटे का साथ
माँ की छवि मन मंदिर में जिसने ली बसाय
रोग मुक्त हो तन उसका काया कल्प हो जाय
श्रृंगारी जो भी करे छप्पन भोग लगाय
रंक भी राजा बन जाए माँ की कृपा जो पाय
नवरात्री में नव कन्या को भोजन जो करवाय
ग्रह दोष से मुक्त हो नवदुर्गा हो सहाय
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
माँ दौड़ी आ जाएगी सुनते ही फरियाद
माँ की आरती जो करे घी का दीप जलाय
बिगड़े भाग्य संवारती किस्मत को चमकाय
माँ की ममता का नही जग में कोई मोल
भक्तों की झोली भरती देती खजाने खोल
करता जो मैया जी के चरणामृत का पान
ब्याधि बाधा सब दूर हो जग में मिले सम्मान
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
जय जय अम्बे सुख करणी
जय जय अम्बे दुःख हरणी
https://www.youtube.com/watch?v=vY5uX4sVz-k
https://youtu.be/mUf2aW7hvlY
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