Tuesday, January 24, 2017

फूल अगर मे होता भवन माँ तेरा महकता शान से

फूल अगर मे होता, भवन माँ तेरा, महकता शान से  
तेरे चरणों से नित मिलता, ममता की छाया में खिलता,
दर से कभी ना तेरे हिलता
फूल अगर मे होता...........................................
कुह-कुह करके द्वारे रटन लगाता,
सावन मे मैया तुझको कजरी सुनाता-2
सावन मे मैया तुझको कजरी सुनाता
कोयल अगर में होता, मन्दिर में गाता गीत बड़ी शान से
फूल अगर मे होता...........................................
किस्मत सजाई होती, अगर मेरी राम ने,
रहता सदा में तेरी, अंखियों के सामने-2
रहता सदा में तेरी, अंखियों के सामने
काजल अगर में होता, आँखों में तेरी, मुस्काता शान से
फूल अगर मे होता...........................................
घिरती घटायें जब नील असमान में,
पंख फेला के पन्ना, नाचता माँ शान से-2
पंख फेला के पन्ना, नाचता माँ शान से
मोर अगर में होता, में नाच बेधड़क, दिखलाता शान से

फूल अगर मे होता...........................................


करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं स्वीकार करो माँ

करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं, स्वीकार करो माँ,
मझधार में मैं अटकी, बेडा पार करो माँ।
हे माँ संतोषी,माँ संतोषी

बैठी हूँ बड़ी आशा से तुम्हारे दरबार में,
क्यूँ रोये तुम्हारी बेटी इस निर्दयी संसार में।
पलटादो मेरी भी किस्मत, चमत्कार करो माँ,
मझधार में मैं अटकी, बेडा पार करो माँ॥

मेरे लिए तो बंद है दुनिया की सब राहें,
कल्याण मेरा हो सकता है, माँ आप जो चाहें।
चिंता की आग से मेरा उद्धार करो माँ,
मझधार में मैं अटकी, बेडा पार करो माँ॥

दुर्भाग्य की दीवार को तुम आज हटा दो,
मातेश्वरी वापिस मेरे सोभाग्य को ला दो।
इस अभागिनी नारी से तुम कुछ प्यार करो माँ,
मझधार में मैं अटकी, बेडा पार करो मां।।